बच्चे नहीं बिगड़े, बस परवरिश में अनुशासन की डोर कमजोर पड़ गई है
बच्चे नहीं बिगड़े, बस परवरिश में अनुशासन की डोर कमजोर पड़ गई है ■ बच्चों को केवल प्यार और सुविधाएँ नहीं, अच्छे संस्कार और अनुशासन भी दें: अनामिका गुप्ता,एजुकेशन डायरेक्टर आधारशिला स्कूल आज हर माता-पिता अपने बच्चों को दुनिया की हर खुशी देना चाहते हैं। उनकी हर जिद पूरी करना, हर परेशानी से बचाना और हर सुविधा उपलब्ध करवाना ही प्यार समझने लगे हैं। लेकिन इसी प्यार में कहीं न कहीं हम बच्चों को जीवन के सबसे जरूरी सबक—अनुशासन, धैर्य, सम्मान और जिम्मेदारी—सिखाना भूलते जा रहे हैं। यह विचार आधारशिला स्कूल, अबोहर की एजुकेशन डायरेक्टर अनामिका गुप्ता ने अभिभावकों और समाज के नाम अपने संदेश में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि "बच्चे जन्म से बिगड़े हुए नहीं होते, उनका व्यक्तित्व हमारी परवरिश से बनता है। यदि हम उनकी हर जिद पूरी करेंगे, हर गलती पर पर्दा डालेंगे और हर मुश्किल से बचाएँगे, तो वे जीवन की चुनौतियों का सामना करना कैसे सीखेंगे?" अनामिका गुप्ता ने कहा कि आज बच्चों के पास सुविधाएँ तो पहले से कहीं अधिक हैं, लेकिन धैर्य, सहनशीलता और बड़ों के प्रति सम्मान कम होता जा रहा है। कई बार शिक्षक बच्चे की गलती सुधारने का प्रयास करते हैं, तो अभिभावक बच्चे का पक्ष लेकर खड़े हो जाते हैं। इससे बच्चे में अपनी गलती स्वीकार करने की भावना कमजोर पड़ती है। उन्होंने अभिभावकों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि "जिस बच्चे की आँखों में एक आँसू देखकर आज आपका दिल पिघल जाता है, उसी बच्चे को यदि आपने छोटी-छोटी निराशाओं से लड़ना नहीं सिखाया, तो कल जीवन की बड़ी मुश्किलों का सामना वह कैसे करेगा?" उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुशासन का अर्थ डराना या दंड देना नहीं, बल्कि प्यार से सही और गलत का अंतर समझाना है। बच्चों को प्यार के साथ सीमाएँ भी चाहिए, क्योंकि प्यार उन्हें सुरक्षा देता है और अनुशासन जीवन की सही दिशा। अंत में उन्होंने कहा कि "आज हम बच्चों के लिए संपत्ति बनाने में इतने व्यस्त हैं कि कई बार उनका चरित्र बनाना भूल जाते हैं। याद रखिए, हमारी सबसे बड़ी विरासत हमारी दौलत नहीं, बल्कि हमारे बच्चों के संस्कार हैं।" उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से मिलकर बच्चों का भविष्य सँवारने की अपील करते हुए कहा कि "बच्चों की हर जिद पूरी मत कीजिए, उन्हें अपने सपने पूरे करने के योग्य बनाइए। क्योंकि एक दिन हमारा हाथ उनके सिर पर नहीं होगा, लेकिन हमारे दिए हुए संस्कार जीवनभर उनका साथ निभाएँगे।"

